श्री स्वामी विवेकानंद जी कहते थे :
-
एक अच्छे चरित्र का निर्माण हज़ारों बार ठोकर खाने के बाद ही होता है।
-
पहले स्वयं संपूर्ण मुक्तावस्था प्राप्त कर लो, उसके बाद इच्छा करने पर फिर अपने को सीमाबद्ध कर सकते हो।
प्रत्येक कार्य में अपनी समस्त शक्ति का प्रयोग करो।
-
ज्ञान स्वयमेव वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है।
-
उठो, जागो और तब तक रुको नही जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये ।